इस जादुई मटकी को टच करके देखो



































































































































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जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं





गोकुल में है जिनका वास

गोपियों के शंग करे निवास

देवकी यशोदा है जिनकी मै या

एशे हैं हमारे कृषणात कनेया

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मैं [Your Name] जन्माष्टमी की इस अवसर पर हम ये कमाना करते हैं कि श्री कृष्णा की कृपा आप पर और आपके परिवार पर बनी रहें.!! जय श्री कृष्णा

श्री कृष्णा और भीष्म पितामह वार्तालाप –

श्री कृष्ण ने अपनी पूरी सेना दुर्योधन को सौंप दी थी और स्वयं पाण्डवों की तरफ से युद्ध का आगाज कर रहे थे। भगवान कृष्ण ने अर्जुन से वादा किया था कि वह युद्ध में हथियार नहीं उठाएँगे और निहत्थे ही पाण्डवों को विजयी बनायेंगे।

युद्ध के नौवें दिन कौरवों के सेनापति भीष्म पितामह में चारों तरफ कहर बरपा रखा था। वो अकेले ही पूरी पांडव सेना पर भारी पड़ रहे थे। भीष्म पितामह अपने वचन और प्रतिज्ञा पर अडिग रहने के लिए जाने जाते थे। उनका मानना था कि जो प्रतिज्ञा उन्होंने की है उसे प्राण देकर भी निभाना है। एक तरफ श्री कृष्ण अपने निहत्थे रहने के वचन से बंधे थे लेकिन वहीं भीष्म पितामह पांडव सेना पर आग उगल रहे थे ऐसा लग रहा था मानो कुछ क्षण में ही भीष्म पांडवों को हरा देंगे।



श्री कृष्ण के बासुरी से जुडी कथा, कैसे मिली भगवान कृष्ण को बांसुरी

दोस्तों आज हम आपके साथ lord krishna की एक intresting story शेयर करने जा रहे. यह कहानी है भगवान श्री श्रीकृष्ण के हाथ में सदैव सोभायमान रहने वाली तथा मथुरावासियों के दिल को जितने वाली बासुरी.

द्वापरयुग के समय जब भगवान श्री कृष्ण ने धरती में जन्म लिया तब देवी-देवता वेश बदलकर समय-समय में उनसे मिलने धरती पर आने लगे. इस दौड़ में भगवान शिव कहा पीछे रहने वाले थे अपने प्रिय भगवान से मिलने के लिए वह भी धरती में आने के लिए उत्सुक हुए.


कृष्ण की मथुरा वासियों पर कृपा

भगवान श्री कृष्ण जी ने मथुरा में प्रवेश किया है। मार्ग में स्थान-स्थान पर गाँवों के लोग मिलने के लिये आते और भगवान श्रीकृष्ण तथा बलरामजी को देखकर आनन्दमग्न हो जाते। सभी एकटक भगवान को निहार रहे थे बस। भगवान के रूप को देखकर कोई भी अपनी दृष्टि नही हटा पा रहा था।

नन्दबाबा आदि व्रजवासी तो पहले से ही वहाँ पहुँच गये थे, और मथुरापूरी के बाहरी उपवन में रुककर उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे । उनके पास पहुंचकर भगवान ने अक्रूर से कहा- ‘चाचाजी! आप रथ लेकर पहले मथुरापुरी में प्रवेश कीजिये और अपने घर जाइये। हम लोग पहले यहाँ उतरकर फिर नगर देखने के लिये आयेंगें’ ।



श्री कृष्ण और सांप कालिया की कहानी

यमुना नदी से जुड़ा हुआ एक मीठे पानी का सुंदर झील था। कहीं से एक बहुत ही जहरीला सांप वहां आकर रहने लगा जिसका नाम था कालिया। कालिया का जहर यमुना नदी के पानी में बहुत तेजी से घुल रहा था।

एक बार एक गाय चराने वाले व्यक्ति ने जब उस झील का पानी पिया तो उसकी मृत्यु हो गई। जब भगवान श्रीकृष्ण को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपनी शक्ति से उस व्यक्ति को जीवित कर दिया।

उसके बाद श्री कृष्ण उस झील के पानी में कूद गए। कृष्ण पानी के बहुत अंदर गए और उस सांप को जोर-जोर से पुकारने लगे। जब बहुत देर तक कृष्ण पानी से नहीं निकले तो गांव के लोग इकट्ठा होकर नदी किनारे उनका इंतजार करने लगे। बहुत सारे लोग डरने भी लगे। कुछ देर बाद पानी के अंदर से कालिया सांप कृष्ण के सामने आया और आते ही उसने कृष्ण पर आक्रमण कर दिया।

माखन चोर भगवान कृष्ण कहानी

आप लोग तो जानते ही होंगे कि भगवान कृष्ण को माखन खाना बहुत पसंद था। कृष्ण के माखन चोरी करने के कारण उनकी मां के साथ-साथ वृंदावन के सभी लोग कृष्ण के माखन चोरी के कारण तंग आ जाते थे। भगवान कृष्ण की माता यशोदा माखन की मटकी को छत के ऊपरी भाग में लटका कर रखती थी जिससे की कृष्ण वहां तक ना पहुंच पाए और माखन को चोरी करके ना खा पाए।

एक बार कुछ जरूरी काम से यशोदा मां घर छोड़कर गई। उस समय कृष्ण अपने सभी मित्रों को वहां लेकर आए। उनकी मदद से वह माखन की मटकी तक पहुंचे और माखन के मटकी को तोड़कर सारा माखन खा गए। उसी समय वहां यशोदा मां पहुंच गए। कृष्ण के सभी साथि भाग गए परंतु कृष्ण वहीं रह गए। उसके बाद कृष्ण को यशोदा मां से अच्छी डांट पड़ी

क्षत्रिय धर्म और युद्ध करने की आवश्यकता का वर्णन

तथा अपने धर्म को देखकर भी तू भय करने योग्य नहीं है अर्थात्‌ तुझे भय नहीं करना चाहिए क्योंकि क्षत्रिय के लिए धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारी कर्तव्य नहीं